इतिहास की झलक: पहले से सातवें वेतन आयोग तक सिफारिशें कब और कैसे लागू हुईं?

भारत में स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक सात वेतन आयोग (Pay Commissions) गठित किए जा चुके हैं और आठंवा गठन किया जाने वाला हैं, इन आयोगों ने न केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी और भत्तों को तय किया, बल्कि राज्य सरकारों और उनके जो कर्मचारी हैं, उनके भी सैलरी बढाएं हैं, अब जब देश 8वें वेतन आयोग की तैयारी कर रहा है, सरकार जल्द ही इसको लागू कर सकता है, किसी भी दिन Chairperson की घोषणा हो सकती हैं, तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि अतीत में पहले से सातवें वेतन आयोग तक की सिफारिशें कब और कैसे लागू हुईं, कितना देरी के बाद हुआ था, और उनका कर्मचारियों पर क्या असर पड़ा था

पहले से सातवें वेतन आयोग तक सिफारिशें

वेतन आयोग क्यों ज़रूरी हैं?

  • अब ऐसे जैसे 10 रुपया का सामान, जितना आप 10 साल पहले ख़रीदा जा सकता था, अब उतना नहीं ख़रीदा जा सकता हैं, तो सरकारी कर्मचारी अगर उनकी सैलरी भी अगर सेम ही रहे, तो फिर वो महंगाई के साथ कैसे ताल-मेल मिला के चल सकते हैं | इसलिए सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप समय-समय पर संशोधित करना जरूरी है। और भारत में यह परंपरा रही है कि हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है।

आयोग का मुख्य उद्देश्य क्या होता हैं?

  1. Minimum and Maximum Pay को तय किया जाता हैं
  2. Allowance को फिर से Review किया जाता हैं
  3. और भी कुछ Allowance जोड़ा जाता हैं या ख़त्म किया जाता हैं
    तो Pay Commission का मतलब केवल यह नहीं होता है कि सैलरी ही बढेगा, बहुत सारी चीजों में भी परिवर्तन किया जाता हैं

सबसे बात पहला वेतन आयोग (1946) के बारे में

तो इसका Constitute किया गया था 1946 में, और इसके जो Chairperson जो इसके थे, उनका नाम था श्री पी. सरन और न्यूनतम वेतन ₹55 प्रति माह तय किया गया था, और उसी वर्ष मतलब 1946 में ही इसको लागू कर दिया था , यह वेतन आयोग सबसे जल्दी लागू किया था, इसके बाद इतना जल्दी pay Commission कभी भी नहीं लागू किया गया हैं

दूसरा वेतन आयोग (1957) में आया

तो यह 1957 में गठित किया गया था और इसके जो अध्यक्ष थे, श्री जगरनाथ दास जी थे, न्यूनतम वेतन ₹80 और अधिकतम ₹2,250 प्रति माह तय किया गया था, सैलरी स्ट्रक्चर को चार क्लास में बंटा गया था, और होने का समय 1960, मतलब Implement होने का समय 1960 था, और 20-25% सैलरी में बढ़ोतरी हुई थी

तीसरा वेतन आयोग (1970) में गठित हुआ

तो अप्रैल 1970 में तीसरा वेतन आयोग को गठित किया मतलब इसका समिति आना और अध्यक्ष जो थे वो न्यायमूर्ति रघुबीर दयाल जी थे, जो मुख्य सिफारिशें इसमें की गयी थी, वो था न्यूनतम वेतन ₹185 और अधिकतम ₹8,000 प्रति माह। और इसको लागू किया गया 1973 में , इसका असर यह हुआ कि इस आयोग ने पहली बार महंगाई से निपटने के लिए DA को स्थायी समाधान के रूप में जोड़ा। जिसने सरकारी कर्मचारी को बहुत हेल्प किया था

चौथा वेतन आयोग (1983) में

जुलाई 1983 अध्यक्ष न्यायमूर्ति पी. एन. सिंह जी को इस चौथे Pay Commission का नेतृत्व दिया गया था, बहुत सारी नयी-नयी सिफारिशें इसमें की गयी थी, जैसे न्यूनतम वेतन ₹750 और अधिकतम ₹8,000 प्रति माह तक किया गया और 19 level इसके तय किये गए थे, ग्रेड पे और सैलरी स्केल्स को नया रूप दिया गया था, इसका लागू होने का समय था, 1986, इसका असर हुआ कर्मचारियों के ऊपर कि उनकी सैलरी में एक अच्छा वृद्धि हुआ था,

पाँचवां वेतन आयोग (1994) में आया

अध्यक्ष न्यायमूर्ति रत्नवल पांडे जी को इसका नेतृत्व इसका दिया गया और न्यूनतम वेतन ₹2,550 और अधिकतम ₹30,000 प्रति माह तय किया गया था, पेंशन में एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया था, मतलब Last Pay Drawn के आधार पर उस टाइम पेंशन को दिया जाना यही से शुरू हुआ था, जिसको आज भी फॉलो किया जाता हैं, और इसके लागू होने का समय, 1997 था

छठा वेतन आयोग (2006) में

2006 के अक्टूबर में न्यायमूर्ति बी. एन. श्रीकृष्णा जी के नेतृव में इस pay Commission के सारे चीज़ को तय किया गया था, इसमें कुछ मुख्य सिफारिशें न्यूनतम वेतन ₹7,000 और अधिकतम ₹90,000 प्रति माह। ग्रेड पे सिस्टम लागू किया गया और उसके बाद में जोखिम बीमा की जगह जोखिम भत्ता (Risk Allowance) भी शुरू किया था, पेंशन सुधार और NPS (National Pension System) पर जोर दिया गया और इसका लागू होने का समय 2008 (सिफारिशें 2006 से लागू मानी गईं, एरियर भी दिया गया, इसमें लगभग 40% से ज्यादा सैलरी की वृद्धि हुई थी

सातवां वेतन आयोग (2014) में

स्थापना हुआ इसका फरवरी 2014 में और अध्यक्ष इसके बनाया गया न्यायमूर्ति ए. के. माथुर को और मुख्य सिफारिशें इसमें की गयी कि न्यूनतम वेतन ₹18,000 और अधिकतम ₹2.5 लाख प्रति माह किया गया और और Pay Matrix System लागू किया गया और Grade Pay को हटाया गया था,
फिटमेंट फैक्टर इसमें 2.57 तय किया गया था और और कई नए allowances इसमें Include किया गया, और लागू होने का समय इसका 1 जनवरी 2016 से से इसको प्रभावी बनाया गया | और इस Pay Commission में कर्मचारियों को लगभग 23% सैलरी की वृद्धि हुई थी

Timeline of Every Pay Commission

वेतन आयोगगठन का वर्षलागू होने का वर्षसमय (लगभग)
पहला19461946तत्काल
दूसरा195719603 वर्ष
तीसरा197019733 वर्ष
चौथा198319863 वर्ष
पाँचवां199419973 वर्ष
छठा200620082 वर्ष
सातवां201420162 वर्ष
इतिहास की झलक पहले से सातवें वेतन आयोग तक सिफारिशें कब और कैसे लागू हुईं 3

देखा जाए तो पहले आयोग को छोड़कर बाकी सभी आयोगों को लागू होने में 2–3 साल का समय तो लगा ही हैं

अब नज़रें 8वें वेतन आयोग पर सबकी हैं

इतिहास बताता है कि हर आयोग को लागू होने में समय लगता है और हर आयोग में कुछ नयी-न-नयी चीजें आई ही हैं, इस बार सरकार ने जनवरी 2026 की समयसीमा तय की है। लेकिन देखिये की अब यह जनवरी 2026 में यह लागू हो पाता या नहीं कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि आयोग की सिफारिशें समय से पहले आएं ताकि उन्हें एरियर का इंतजार न करना पड़े। 2026 से सब लागू हो जाएँ

तो कुल मिला के बात यह है कि पहले से सातवें वेतन आयोग तक हर आयोग ने भारत के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है और बहुत भारी बदलाव किया हैं, अब देश इंतजार कर रहा है कि 8वां वेतन आयोग का, अब इस यात्रा को किस नए मुकाम पर ले जाएगा। देखने वाली बात होगी

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