अभी हेमंत बिस्वा शर्मा ने, 8th Pay commission का घोषणा किया, वो आज़ाद भारत के इतहास का पहला राज्य बन गया, जो केंद्र सरकार के Pay Commission लागू होने से पहले ही, अपना स्टेट का pay Commission का घोषणा कर दिया, इससे पहले सेंटर अपना पे कमीशन लागू करता है, फिर राज्य जो है, उसको फॉलो करता है, या फॉलो नहीं भी करता हैं, वैसे जब मैंने पहली बार सुना कि असम सरकार ने अपना अलग पे कमीशन बनाने का फैसला किया है, तो सोचा कि शायद यह कुछ अच्छी खबर है। लेकिन जब आप थोड़ा गहराई से देखते हैं, तो असली तस्वीर कुछ अलग दिखती है। आज के आर्टिकल में मैं यह डिटेल में बताऊंगा कि यह कैसे थोडा ग़लत है, और कैसे सही भी है|

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पहली बार हो रहा है ऐसा |
देखिए, यह बात तो सच है कि भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने अपना अलग पे कमीशन बनाने का फैसला लिया है। असम सरकार ने कुछ दिन पहले ही इसकी घोषणा की। सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है – लोग खुश भी हो रहे हैं कि चलो कम से कम कुछ तो हो रहा है।
लेकिन ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लई फेडरेशन के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. मजीत सिंह पटेल का कहना है कि यह कोई खुशी वाली बात नहीं है। और जब आप उनकी बात सुनते हैं तो समझ आता है कि क्यों। आगे मैं आर्टिकल में उनकी बात पर चर्चा करूँगा |
असली समस्या क्या है?
सबसे बड़ी बात यह है कि जब कोई राज्य अपना अलग पे स्ट्रक्चर बनाता है, तो वह सेंट्रल गवर्नमेंट के पे स्ट्रक्चर से अलग होगा। अब सोचिए, अगर हर राज्य अपना अलग structure बनाने लगा, तो क्या होगा?
मजीत सिंह पटेल का कहना बिल्कुल सही है – अगर आपको पूरे देश में एक जैसा system रखना है, एक भारत श्रेष्ठ भारत की बात करनी है, तो सबको सेंट्रल गवर्नमेंट के पे कमीशन को ही follow करना चाहिए। मतलब अगर अभी भी आपको समझ में नहीं आ रहा है, तो मंजीत पटेल बहुत पहले one country, one pay का बात करते आ रहे हैं, ऐसे अभी क्या होता हैं, अलग-अलग राज्य का अपना अलग-अलग pay Strucuture है, अब होता क्या है, कोई टीचर है, बिहार का उस बेचारे को 30 हज़ार रूपये लगभग मिलते हैं, लेकिन वही टीचर उत्तरप्रदेश का उसको 40 हज़ार मिलते हैं, सेम जॉब, लेकिन अलग-अलग पैसा, तो तो मंजीत पटेल कहना हिया कि असाम का अपना पे कमीशन होगा, तो जो इनका आवाज़ ये लोग उठा रहे है, एक देश एक पे कमीशन का, वो धीमा पड़ जाएगा, तो इसलिए असम के पे कमीशन से खुश नहीं होना है|
देखिए, असम में भी और केंद्र में भी एक ही पार्टी की सरकार है। तो फिर सवाल उठता है कि अलग से पे कमीशन बनाने की क्या जरूरत थी?

जैसा कि पटेल जी ने कहा – यह तो ऐसा लगता है कि पब्लिक को attract करने के लिए, लोगों को लुभाने के लिए यह announcement किया गया है। “देखो, हम तुम्हारे लिए पे कमीशन का गठन कर रहे हैं” – यह दिखाने के लिए।
इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। और जब कोई चीज पहली बार हो रही हो, तो उसे लेकर सावधान रहना जरूरी है।
असली नुकसान किसका होगा?
अब मान लीजिए कि असम अपना अलग पे structure बना लेता है। तो chances यह हैं कि वह सेंट्रल गवर्नमेंट की salary से कम होगा। क्योंकि कोई भी राज्य सरकार केंद्र से बेहतर salary तो नहीं देने वाली है।
तो मतलब यह है कि असम के government employees को नुकसान हो सकता है। जो benefit उन्हें सेंट्रल पे कमीशन से मिलता, वह शायद नहीं मिले। तो इसलिए भी, ऐसा कहा जा रहा है,
और क्या हो सकता था?
पटेल जी ने बिल्कुल सही कहा है कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा जी को चाहिए था कि वह सेंट्रल गवर्नमेंट के पे कमीशन को ही follow करें। अलग से बनाने की कोई जरूरत नहीं थी।
सेंट्रल गवर्नमेंट जब अपना पे कमीशन बनाएगी, उसी structure को follow कर लेते। पूरा देश एक जैसा हो जाता, सबको equal benefit मिलता।
8वां पे कमीशन की असली स्थिति
अगर हम बात करें 8वें पे कमीशन की, तो वहाँ भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। 28 अक्टूबर को officially गठन हुआ था, लेकिन अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है।
तीन महीने हो गए हैं – नवंबर गया, दिसंबर गया, अब जनवरी भी खत्म होने वाला है। लेकिन अभी तक कमीशन का office भी set नहीं हुआ है, कोई meeting schedule नहीं हुई है।
सरकार खुद कह रही है कि 18 महीने लगेंगे। लेकिन जिस तरह से काम चल रहा है, उससे तो लगता है कि यह 2028 तक भी नहीं पहुंचेगा।
कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
देखिए, असम के कर्मचारियों को अब यह demand करनी चाहिए कि राज्य सरकार सेंट्रल पे कमीशन को ही follow करे। अलग structure से उनका ही नुकसान होगा।
और बाकी देश के कर्मचारियों को भी अपनी आवाज उठानी चाहिए कि सरकार जल्द से जल्द 8वां पे कमीशन लागू करे। इसे चुनावों से नहीं जोड़ना चाहिए।
यह राजनीतिक खेल क्यों?
एक बात तो साफ है – सरकार कर्मचारियों के मुद्दों को अपनी राजनैतिक strategy में use कर रही है। दिल्ली चुनाव के time announcement, बिहार चुनाव के time गठन, और अब शायद UP चुनाव के time implementation।
लेकिन यह सही नहीं है। सरकारी कर्मचारी सरकार का हिस्सा होते हैं, किसी political party के नहीं। उनके साथ यह खेल नहीं होना चाहिए।
क्या है solution?
सबसे अच्छा solution यही है कि पूरे देश में एक ही पे structure हो। सभी राज्य सरकारें सेंट्रल गवर्नमेंट के पे कमीशन को follow करें।
इससे कर्मचारियों को भी confusion नहीं होगी, और पूरे देश में uniformity रहेगी। कहीं ज्यादा, कहीं कम – यह नहीं होगा।
असम सरकार को अभी भी मौका है कि वह अपना फैसला बदले और सेंट्रल structure को ही अपनाए। यह उनके अपने कर्मचारियों के हित में होगा। वैसे आप लोग भी अपना राय कमेंट में दें,
तो ये मंजीत पटेल ने जो बोला था, वो बताया मैंने आपको आज के आर्टिकल में, आप भी बताइए कमेंट में कि आज का आर्टिकल कैसे लगा और असम के पे कमीशन के बारे में आप क्या सोचते हैं, जो चीज ऊपर से बहुत अच्छी लग रही थी. लेकिन उसके डिटेल में जाइए फिर बताइए चीज़ क्या हैं, |
FAQs: Assam Pay Commission Announcement
Q1: असम का अलग वेतन आयोग क्यों बनाया जा रहा है?
असम सरकार ने केंद्रीय वेतन आयोग की प्रतीक्षा किए बिना अपने कर्मचारियों के वेतन संशोधन के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने का निर्णय लिया। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी राज्य का पहला ऐसा कदम है।
Q2: Dr. Manjeet Patel इससे सहमत क्यों नहीं हैं?
Dr. Patel का तर्क है कि अलग वेतन संरचना “One Country One Pay” के सिद्धांत को कमज़ोर करती है। यदि हर राज्य अलग आयोग बनाए तो असमानता और बढ़ेगी। साथ ही असम का अलग आयोग केंद्र से कम लाभ दे सकता है।
Q3: “One Country One Pay” का क्या अर्थ है?
यह Dr. Patel का प्रमुख तर्क है — पूरे देश में केंद्र सरकार की Pay Structure को सभी राज्य कर्मचारियों पर समान रूप से लागू किया जाए, ताकि समान कार्य के लिए समान वेतन मिले।
Q4: क्या असम के कर्मचारियों को नुकसान होगा?
यह इस बात पर निर्भर करेगा कि असम का आयोग क्या सिफारिशें करता है। यदि वेतन केंद्रीय स्तर से कम रहा, तो हाँ — असम के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में कम लाभ मिलेगा।
Q5: अन्य राज्य क्या करते हैं जब केंद्र का वेतन आयोग आता है?
अधिकांश राज्य केंद्र की सिफारिशों के बाद अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार 6 महीने से 3 साल के भीतर इसे लागू करते हैं। असम का निर्णय इस परंपरा से भिन्न है।