कई कर्मचारी संगठन कह रहे है कि ठीक सरकार 2027-28 में 8th Pay Commission लागू करेगी लेकिन तब तक, कम से कम Dearness allowance और Basic Pay को तो merge कर दिया जाएँ, आपके घर में भी DA (Dearness Allowance) को Basic Pay में merge करने की बातें चल रही होंगी। यह मुद्दा काफी पुराना है और हर Pay Commission के बाद फिर से उठ खड़ा होता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सरकार इसे अभी तक क्यों नहीं मिला रही? चलिए, आज मैं आपको इसकी पूरी inside story बताता हूं – वो भी बिल्कुल detail में।

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DA और Basic Pay क्या है ? – पहले यह समझ लीजिए
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि DA और Basic Pay actually होते क्या हैं। Basic Pay वह मूल वेतन है जो आपको आपकी grade और experience के हिसाब से मिलता है। यह fixed होता है और हर महीने same रहता है (जब तक increment या promotion न हो)।
वहीं DA एक allowance है जो महंगाई के हिसाब से बढ़ता रहता है। आप भी शायाद जानते ही होंगे इस बारे में, हर 6 महीने में सरकार इसे revise करती है। अभी January 2026 में DA लगभग 58% के आसपास चल रहा है (यह थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है)। मतलब अगर आपकी Basic Pay ₹50,000 है तो आपको लगभग ₹26,500 DA के रूप में अलग से मिल रहा है।
DA की calculation Consumer Price Index (CPI) के base पर होती है। जब market में चीजों के दाम बढ़ते हैं – चाहे वो खाने-पीने का सामान हो, petrol-diesel हो, या कोई भी essential commodity हो – तो CPI बढ़ता है। इसी के according सरकार DA को adjust करती है ताकि employees की purchasing power maintain रहे।
तो फिर problem क्या है? Merge क्यों नहीं हो रहा?
अब आप सोच रहे होंगे कि भाई यह सब ठीक है, लेकिन actually merge करने में क्या दिक्कत है? चलिए, मैं आपको वो असली reasons बताता हूं जो सरकार publicly नहीं बताती।
1. सरकार का खजाना खाली हो जाएगा
यह सबसे बड़ा reason है। अगर DA को Basic Pay में merge कर दिया जाए, तो सरकार का खर्च एकदम से आसमान छू जाएगा। क्यों? क्योंकि बहुत सारे allowances और benefits Basic Pay के percentage पर calculate होते हैं।
जैसे समझिए – HRA (House Rent Allowance) आपकी Basic Pay का 27%, 18% या 9% होता है (आपके city classification के हिसाब से)। अगर Basic Pay में DA merge हो गया तो HRA automatically बढ़ जाएगा। Transport Allowance बढ़ेगा। Pension contribution बढ़ेगी। GPF (General Provident Fund) की calculation बढ़ेगी।
मान लीजिए अभी आपकी Basic Pay ₹50,000 है और DA ₹26,500 है। अगर merge हो गया तो आपकी new Basic Pay हो जाएगी ₹76,500। अब इस पर HRA calculate कीजिए – पहले जो ₹13,500 था (27% of ₹50,000), वो हो जाएगा ₹20,655 (27% of ₹76,500)। सिर्फ HRA में ही ₹7,000+ का monthly फर्क पड़ गया!
अब यह calculation करोड़ों government employees पर लागू कीजिए। भारत में लगभग 1 करोड़ से ज्यादा central government employees और उससे भी ज्यादा state government employees हैं। अगर average monthly extra burden ₹10,000 per employee भी मान लें, तो यह सालाना ₹1.2 लाख करोड़ से ज्यादा का extra खर्च हो जाएगा! यह amount भारत के कई states के पूरे साल के budget से भी ज्यादा है।
2. Pension का गणित पूरी तरह बदल जाएगा
यह भी बहुत बड़ा मुद्दा है। Old Pension Scheme में जो लोग हैं, उनकी pension last drawn Basic Pay के हिसाब से calculate होती है। अगर DA merge हो गया तो pension amount एकदम से double के करीब हो जाएगी।
मान लो कोई employee retire हो रहा है जिसकी Basic Pay ₹80,000 है और DA ₹42,400 (53%) है। अभी उसकी pension ₹40,000 (50% of Basic Pay) होगी। लेकिन अगर DA merge हो गया तो Basic Pay हो जाएगी ₹1,22,400 और pension बन जाएगी ₹61,200। यह तो सिर्फ एक employee का हिसाब है!
अब सोचिए – हर साल लाखों government employees retire होते हैं। अगर सबकी pension इतनी बढ़ जाए तो सरकार के pension budget का क्या हाल होगा? वैसे भी India में pension liability एक बहुत बड़ा concern है। कई economists का मानना है कि आने वाले दशकों में यह और भी बड़ा challenge बन सकता है जब baby boomer generation retire होगी। तो इतना आसन नहीं है, जितना आसान हमें लगता हैं, इसमें टाइम तो लगता हैं,
क्या कभी हुआ है DA का Basic Pay में merger?
हाँ, हुआ है! Actually यह process काफी पुरानी है। हर major Pay Commission के implementation के समय सरकार उस time तक accumulated DA को Basic Pay में merge करती है।
जैसे 7th Pay Commission implement करते time तक DA 125% पहुंच गया था। तो effectively जब नई Basic Pay calculate की गई तब वो पुराना DA भी automatically merge हो गया। लेकिन यह एक systematic तरीका है जो Pay Commission के साथ होता है, न कि randomly बीच में।
6th Pay Commission के समय भी यही हुआ था। 5th Pay Commission में भी same pattern follow किया गया था। यह एक established practice है जो decades से चली आ रही है। इस approach की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह predictable है – employees और सरकार दोनों को पता है कि अगले Pay Commission में क्या होने वाला है।
International comparison – दूसरे देशों में क्या होता है?
यह जानना भी interesting होगा कि दूसरे देश इस issue को कैसे handle करते हैं। कई developed countries में DA जैसा कोई concept ही नहीं है। वहां सीधे salary में cost of living adjustments (COLA) include होते हैं जो annually या quarterly revise होते रहते हैं।
लेकिन developing countries जहां inflation volatility ज्यादा है, वहां India जैसा ही system follow किया जाता है। Pakistan, Bangladesh, Sri Lanka – सब में similar DA mechanisms हैं। इससे government को flexibility मिलती है inflation के according adjustments करने की।
Union leaders क्या कहते हैं?
Government employees के unions regularly इस demand को उठाते रहते हैं। उनका argument है कि DA अब salary का permanent part बन चुका है और इसे Basic Pay में merge करना चाहिए।
- National Council (Staff Side) – यह JCM का part है और regularly इस issue को उठाता है
- BMS (Bharatiya Mazdoor Sangh) – RSS से affiliated यह union भी DA merger की demand करता है
- INTUC – Congress से जुड़ा यह union भी इस पर vocal रहता है
लेकिन सच यह है कि unions भी समझते हैं कि mid-term merger practically possible नहीं है। इसलिए ज्यादातर unions का real focus अगले Pay Commission को जल्द से जल्द लाने पर है, ताकि systematic merger हो सके। मंजीत पटेल ने भी शायाद बोला था इस बारे में,

तो फिर solution क्या है?
Honestly बोलूं तो सबसे sensible approach यही है कि मौजूदा system को continue रखा जाए और हर Pay Commission के साथ एक systematic merger किया जाए। यह तरीका financially sustainable भी है और administratively भी manage करना आसान है।
सरकार को चाहिए कि वो DA को regularly revise करती रहे (जैसे अभी कर रही है) और हर 10 साल में आने वाले Pay Commission के through एक comprehensive revision करे। इससे employees को भी फायदा मिलता रहेगा और सरकार के finances पर भी अचानक बोझ नहीं पड़ेगा।
कुछ experts का suggestion है कि Pay Commission का cycle 10 साल से कम किया जाना चाहिए – शायद 7-8 साल। इससे employees को ज्यादा बार revisions मिलेंगे और DA भी इतना ज्यादा accumulate नहीं होगा। लेकिन यह भी एक debatable point है क्योंकि बार-बार Pay Commission बनाना भी expensive और time-consuming process है।
तो आज के आर्टिकल में मैंने डिटेल में सब कुछ बता दिया हैं, उम्मीद है आप पूरी तरीके से, आप को सब कुछ समझ में आ गया होगा कि कैसे क्या करना हैं, और सरकार क्यूँ Dearness Allowance को merge नहीं करती हैं | अभी के लिए, उम्मीद है यह आर्टिकल आपको helpful लगा होगा |
1. DA को Basic Pay में Merge करने से क्या होता है?
DA Merge होने पर Basic Pay बढ़ जाती है, जिससे HRA, Transport Allowance, Pension और GPF सभी automatically बढ़ जाते हैं। यह Cascade Effect सरकार के वित्तीय बोझ को तेज़ी से बढ़ाता है।
2. क्या इतिहास में DA कभी Basic Pay में Merge हुआ है?
हाँ। हर वेतन आयोग के समय accumulated DA को नई Basic Pay में systematically शामिल किया जाता है। 7वें CPC में 125% DA Fitment Factor 2.57 के माध्यम से नई Basic Pay में समाहित हुआ था।
3. 8वें वेतन आयोग में DA का क्या होगा?
8वाँ वेतन आयोग लागू होते समय वर्तमान DA (जो 2027 तक लगभग 70-80% हो सकता है) Fitment Factor की गणना में शामिल होकर नई Basic Pay का हिस्सा बन जाएगा। इसके बाद DA फिर से 0% से शुरू होगा।
4. कर्मचारी संगठन 50% DA Merger क्यों मांग रहे हैं?
12 फरवरी 2026 की हड़ताल में Confederation ने मांग रखी कि पूरे 58% DA में से 50% को तुरंत Basic Pay में Merge किया जाए और 20% Interim Relief दी जाए। यह 8वें CPC की प्रतीक्षा के दौरान तात्कालिक राहत के रूप में मांगा जा रहा है।
5. क्या सरकार mid-term DA Merger कर सकती है?
तकनीकी रूप से सरकार mid-term DA Merger कर सकती है। उदाहरण के लिए, 2004 में 6th CPC से पहले ऐसा किया गया था। लेकिन fiscal burden के कारण सरकार आमतौर पर Pay Commission के साथ ही systematic Merger करती है।