जबसे केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की घोषणा की है तब से कर्मचारी संगठन और यूनियनें अपनी-अपनी मांगों को सामने रख रहे हैं, और सरकार पर बहुत ज्यादा दबाव बना रहे हैं, फिटमेंट फैक्टर से लेकर के, जल्दी Pay Commission लागू होने तक, कई मांगे हैं, जो हैं, ये संगठन कर रहे हैं
देशभर के 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी हैं, जो Central Government में काम करते हैं, यहाँ पर केवल Central government employees का बात हो रहा हैं, अलग-अलग राज्यों के लिए जो अलग-अलग सरकारी कर्मचारी हैं, उनका नहीं हैं, और पेंशनभोगी भी Central Government में आते हैं, तो उनको भी फरक पड़ेगा इस 8th Pay Commission से
कर्मचारी संगठनों की भूमिका क्यों अहम है? क्यूँ वो कह रहे हैं 8th Pay Commission में उनसे भी राय लिया जाएँ
भारत में हर वेतन आयोग के गठन से पहले JCM (Joint Consultative Machinery) और अन्य कर्मचारी संगठनों से राय ली जाती है। यह लगभग सभी Pay Commission में हुआ हैं, केवल 8th Pay Commission का बात ही नहीं हैं, इसी लिए वो इस बार भी मांग कर रहे हैं
8वें वेतन आयोग पर यूनियनों की प्रमुख मांगें क्या-क्या हैं?

- न्यूनतम वेतन में बड़ा सुधार
o 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन ₹18,000 तय हुआ था। यूनियनें मांग कर रही हैं कि 8वें आयोग में इसे ₹35,000 – ₹40,000 तक किया जाए। मतलब लगभग दुगना, उनका तर्क है कि पिछले 10 सालों में महंगाई और जीवन-यापन की लागत कई गुना बढ़ गई है। तो इसलिए भी सरकार को यह करना ज़रूरी हो जाता हैं। उनकी मांगे को मांगनी चाहिए - फिटमेंट फैक्टर 3.0 करने की मांग
o 7वें आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। और हम सब जानते है कि Fitment Factor ही सब कुछ तय करता हैं, कितना प्रतिशत की सैलरी में वृद्धि हो सकता हैं, अब कर्मचारी संगठन इसे 3.0 से कम न रखने की मांग कर रहे हैं। और अगर ऐसा होता हैं, उनका जो सैलरी हैं, वो दुगुना से कही ज्यादा हो जाएँ, मतलब Basic Pay 18000 हैं, तो अगर Fitment factor को 3.0 किया गया तो, 40 हज़ार सैलरी तक जा सकती हैं, Level 1 के कर्मचारियों - महंगाई भत्ता (DA) को तीन में संसोधन किया जाएँ
o अभी DA हर छह महीने में CPI (Consumer Price Index) के आधार पर संशोधित होता है। यूनियनें चाहती हैं कि DA को हर तीन महीने में संशोधित किया जाए। मतलब साल में चार बार ऐसा हो, इससे महंगाई का सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर न पड़े। और वो महंगाई के साथ तालमेल बिठा के चल सके - HRA और TA में संशोधन
o मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों की बढ़ती लागत को देखते हुए HRA दरों में सुधार। मतलब उनको ज्यादा House Rate Allowance मिले
o ट्रांसपोर्ट कॉस्ट में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं, पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, तो लगातार बढ़ोतरी के कारण TA को भी दोगुना करने की मांग ताकि वो कहीं पे यात्रा आसानी से कर सके - पेंशन सुधार हो
o पेंशनरों के लिए न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़ाकर ₹20,000 करने की मांग हैं, और Old Pension को भी लागू करने के लिए कई संगठन बोल रहे हैं, Dearness Relief (DR) को पूरी तरह से लागू करने की गारंटी हो। Family Pension को बेसिक पेंशन के 30% से बढ़ाकर 40% करने का प्रस्ताव पास किया जाए। मेडिकल खर्च को कवर करने के लिए CGHS और हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम को मजबूत बनाने की मांग वो कर रहे हैं, ताकि health emergencies से वो आसानी से डील कर सके - वेतन आयोग हर 5 साल में गठित हो
o यह मांग सबसे ज्यादा हो रहा हैं, उनका कहना हैं, जब Pay Commission को लागू किया जा रहा हैं, हर बार 10 साल पर लागू किया जाता हैं, और कई बार किया होता हैं कि लागू करने का समय आगे भी हो जाता हैं, तो इन लोगों का कहना हैं कि Pay Commission हर 5 साल में गठित हो, कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इसे घटाकर 5 साल कर दिया जाए, ताकि महंगाई और खर्चों के अनुरूप वेतन जल्दी एडजस्ट हो सके
सरकार के साथ यूनियनों की बातचीत
• फरवरी 2025 में JCM की स्थायी समिति की बैठक में कर्मचारियों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं, सरकार ने कहा कि इनके ऊपर विचार किया जाएगा
• जून 2025 में यूनियनों ने कैबिनेट सचिव को पत्र भेजकर ToR में इन मांगों को शामिल करने की अपील की। लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है इस सम्बन्ध में
यह वजह है कि कर्मचारी संगठनों में असंतोष बढ़ रहा है और वे लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि उनकी मांगें शामिल नहीं की गईं तो आंदोलन और हड़ताल जैसे कदम उठाए जा सकते हैं तो सरकार को इन सब चीजों पर ध्यान देना चाहिए
पिछले आयोगों से क्या-क्या सबक हमें मिला
• 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में 22 महीने तक लगे थे
• 7वें वेतन आयोग में भी 18 महीने से ज्यादा का भी समय लग गया था
• इस बार सरकार के पास सिर्फ 1 साल का समय है
• यूनियनें कह रही हैं कि अगर समय पर आयोग गठित नहीं हुआ और उनकी मांगें शामिल नहीं हुईं तो कर्मचारियों का भरोसा सरकार से पूरी तरह उठ जाएगा और वो आन्दोलन करेंगे ही करेंगे
Expert क्या सोचते हैं इस बारे में?
• आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूनियनों की मांगें वाजिब तो हैं, लेकिन फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है जो ठीक नहीं तो थोड़ा संगठन भी संयम बरते, और ताकि देश के सभी वर्गों का विकास हो
• पूर्व नौकरशाहों का मानना है कि सरकार संतुलित रास्ता अपनाएगी – यानी वेतन वृद्धि भी होगी और आर्थिक अनुशासन भी
• कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे जनवरी 2026 से पहले राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। तो वो पहले से ही सरकार को चेतावनी देते आ रहे हैं
निष्कर्ष:
तो निष्कर्ष यही निकलता है कि 8वें वेतन आयोग पर कर्मचारी संगठनों का रुख बेहद स्पष्ट है। वो न्यूनतम वेतन और पेंशन में भारी बढ़ोतरी चाहते हैं, वो फिटमेंट फैक्टर 3.0 चाहते हैं, DA और HRA में सुधार चाहते हैं, और चाहते हैं कि वेतन आयोग हर 5 साल में गठित हो
ये वे प्रमुख मुद्दे हैं जिन्हें यूनियनें आयोग के Terms of Reference में शामिल कराना चाहती हैं। आने वाले महीनों में सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि जनवरी 2026 से कर्मचारियों और पेंशनरों को कितना फायदा मिलेगा। और किस तरीके से वो इसको लागू करते हैं