देशभर के 1.2 करोड़ से भी ज्यादाकेंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी जहां 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं राज्य सरकारों के सरकारी कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है – “हमें फायदा कब तक मिलेगा? हमारें लिए 8th Pay Commission कब ख़ुशी लाएगा?” इतिहास गवाह रहा है कि हर Pay Commission की सिफारिशें पहले केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू होती हैं और फिर धीरे-धीरे राज्य सरकारें भी उन्हें अपनाती हैं। और आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि ऐसे भी कई राज्य हैं जहाँ अभी तक 7th Pay Commission लागू नहीं हुआ हैं, और सरकार ने यहाँ 8th pay Commission का घोषणा कर दिया हैं लेकिन खैर यह लेख राज्य के कर्मचारियों के लिए हैं

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क्यों ज़रूरी है यह सवाल?
- हमारें अपनेभारत में लगभग 1.8 करोड़ राज्य सरकार Emoyees और Pensioners हैं।
- Central Pay Commission की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्य सरकारें भी अपने-अपने कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन देती हैं। Pay Commission के हिसाब से, वो अपने राज्य में भी Pay Commission लागू करती हैं, लेकिन अक्सर 6 महीने से लेकर 2 साल तक की देरी हो जाती है। जैसा कि ऊपर मैंने बताया कि कई ऐसे राज्य हैं, जहाँ तक अभी तक 7th Pay Commission नहीं लागू हुआ हैं
- इस बार जब सरकार ने 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू करने की घोषणा की है, हालांकि आधा से ज्यादा साल बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई Update नहीं 8th Pay Commission को लेकर के, तो राज्यों में काम कर रहे जो कर्मचारी है, वो भी उम्मीद कर रहे हैं, उनका भी सैलरी बढेगा
पिछले Pay Commission से हमें क्या सीखने को मिलता हैं ?राज्यों तक कब पहुँचा फायदा?
6वां वेतन आयोग (2006–2008)
- केंद्र में लागू: 2008 (1 जनवरी 2006 से प्रभावी, एरियर सहित)।
- राज्यों में स्थिति:
- उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा जैसे राज्यों ने 2009 में लागू किया। देख रहे हैं यहाँ पर 3 साल बाद |यहाँ तक कि कुछ राज्यों में 2010–2011 , 6th Pay Commission को लागू करने में समय गया हुआ था।
7वां वेतन आयोग (2014–2016)
- केंद्र में लागू: 1 जनवरी 2016।
- राज्यों में स्थिति:
- मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों ने 2017 में अपनाया गया,
- पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों ने के कारण 2018–2019 में लागू किया गया था, मतलब लगभग 4-5 साल बाद,
तो इन सब चीजों से हमें क्या पता चलता है कि Central में Pay Commission लागू होने के बावजूद, राज्यों को फायदा पहुँचने में 1 से 3 साल तक का समय लगा था और और शायाद 8th Pay Commission में भी यही हो सकता हैं
राज्य सरकारों की सबसे बड़ी चुनौती क्या हैं 8th Pay Commission को लेकर के
वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से केंद्र सरकार पर लाखों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आता है। इस बार 9% हो जाएगा मतलब पहले जितना सरकार का बजट हैं, उसका 5% ही सरकारी कर्मचारियों को देना पड़ता था, लेकिन अब यह 9% सरकार के बजट का, सरकारी कर्मचारियों के ऊपर खर्च होगा, अब राज्यों की स्थिति इससे भी ज्यादा जटिल है, अभी हिमचाल प्रदेश क़र्ज़ से जूझ रहा हैं, केंद्र से मिलने वाला GST मुआवजा भी घटता जा रहा है, ऐसे में राज्य सरकारें अक्सर तुरंत वेतन आयोग लागू नहीं कर पातीं और करने में दिक्कत भी होगी ही
कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं ?
राज्य कर्मचारियों के संगठनों ने भी अपनी मांगें रखनी शुरू कर दी हैं:
- 8वें वेतन आयोग को तुरंत लागू किया जाए – ताकि केंद्र के साथ-साथ राज्यों के कर्मचारी भी फायदा उठा सकें जल्दी से जल्दी
- एरियर का भुगतान – अगर देरी होती है तो कर्मचारियों को पिछले महीनों का एरियर मिले, ऐसा हर बार होता रहा हैं, बहुत से ऐसे Pay Commission हैं, जो टाइम पर लागू हुआ था,
- महंगाई भत्ता (DA) समान रूप से लागू हो – कई बार राज्यों में DA की दर केंद्र से अलग होती है। तो यहाँ Central के हिसाब से राज्य के लोगों का भी DA हो
- OPS (Old Pension Scheme) – कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल हुई है, वे चाहते हैं कि 8वां आयोग OPS वालों पर भी लागू हो। और हर राज्य में बहाल हो, यहाँ तक कई राजनितिक दल ने भी इसका समर्थन किया हैं
राज्यों पर राजनीतिक दबाव क्या हैं 8th Pay commission को लेकर के
राज्य सरकारें जानती हैं कि अगर वे वेतन आयोग जल्दी लागू नहीं करतीं तो कर्मचारियों का गुस्सा वोट बैंक राजनीति पर असर डाल सकता है। उनको भी अपने राज्य के जो सरकारी कर्मचारी हैं, उनको खुश रखना हैं, ताकि वह वोट दें, जैसे हाल ही में राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने OPS (Old Pension Scheme) लागू करके कर्मचारियों को खुश करने की कोशिश की गई हैं, तो संभावना है कि 8वां वेतन आयोग भी चुनावी सालों में राज्यों की राजनीति को प्रभावित करेगा। और यहाँ तक बिहार चुनाव के टाइम पर भी इसका घोषणा किया जा सकता है क्योंकि बिहार के लोग सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी में हैं
क्या कह रहे हैं जो कर्मचारी संगठन हैं?
- ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज फेडरेशन ने मांग की है कि केंद्र की सिफारिशों के साथ ही राज्यों में भी तुरंत लागू किया जाए। राज्य के कर्मचारियों को नज़रंदाज़ न किया जाएँ,
- कई राज्य स्तरीय यूनियनें चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर देरी हुई तो वे धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करेंगी। अभी एक रेलवे का एक संगठन ने भी इसके मामले में प्रदर्शन किया था, की जल्दी 8th Pay commission को लागू किया जाएँ |कर्मचारी के जो आधिकार के लिए जो संगठन लड़ते हैं, उन संगठनों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, और अगर 2–3 साल देरी हुई तो वेतन वृद्धि का असली फायदा खत्म हो जाएगा। तो इसको जल्दी और अभी लागू किया जाएँ
क्या कर सकती हैं राज्य सरकारें?
- किस्तों में लागू करना – कुछ राज्य पहले न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर लागू करेंगे, बाकी भत्ते बाद में, जैसा कि 7th Pay Commission के टाइम पे हुआ था,
- एरियर को टालना – केंद्र की तरह एरियर तुरंत न देकर किस्तों में भुगतान यह भी एक अच्छा विकल्प हैं, उनके लिए
- राजनीतिक प्राथमिकता – चुनावी साल में जल्दी लागू करना, अन्यथा देरी ताकि उनको वोट मिले, वो फिर से सरकार में आ सकते हैं,
राज्यों को फायदा कब तक पहुँचेगा?
- अगर केंद्र सरकार जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू कर देती है, जिसका सम्भावना तो बहुत कम लग रहा हैं तो जो Rich states हैं, जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, ये लोग इसे 2026–27 में जल्दी लागू कर सकते हैं। चूँकि इनकी स्थिति अछि हैं
- वहीं गरीब राज्य जो अभी वितीय संकट से झूझ रहे हैं, झेल रहे राज्य जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तराखंड, ये लोग इसे 2027–28 तक टाल सकते हैं। तब कही ये लागू करेंगे
- चुनावी साल वाले राज्य तुरंत फायदा देंगे, ताकि कर्मचारियों का समर्थन मिल सके। तो बिहार में कही यह देखने को मिल सकता हैं
यानी राज्य सरकारों के कर्मचारियों को फायदा पहुँचने में कम से कम 6 महीने से लेकर 2 साल तक यहाँ तक कि 5 साल तक का समय भी लग सकता है
8वें वेतन आयोग का असर राज्य सरकार के कर्मचारियों तक पहुँचना तय है, पहुंचेगा ही लेकिन यह प्रक्रिया समय लेने वाली होगी, टाइम लगेगा,
कुछ राज्यों में 2026 से ही फायदा मिलने लगेगा। तो कोई 2030 तक खीच के ले जायेंग| इतिहास बताता है कि केंद्र के बाद राज्यों तक सिफारिशें पहुँचने में हमेशा देरी हुई है। इस बार भी तय है कि होगी